मेरी कहानी भाग-2, my story part 2,
मेरे पिताजी के पास जमीन नही के बराबर होने के कारण दुसरो की जमीन भाग में जोतकर तन तोड़ महेनत करते थे और जब अनाज पैदा होता था तो आधा अनाज खेत के मालिक को देना पड़ता था क्योकि जमीन उसकी है। मे सरकारी स्कुल में पढ़ता था तब दुसरो के बच्चो को देखकर काफी दुःखी हुआ करता था। पर मुझसे अधिक गरीब बच्चो को देखकर खुद को थोड़ा अच्छा महसूस भी कर लिया करता था। लेकिन गरीबी एक अभिश्राफ् की तरह होती हैं आती हैं मगर जाती नही मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ और 1999, मे 11 साल की उम्र में पाचवी क्लास पास होने के बाद सिक्स क्लास में जाने के 6 महीनों बाद मुझे बीच में अपनी शिक्षा छोड़नी पड़ी। और एक दिन बिना बताए गाव से किसी को बताए बिना कमाने के लिए गुजरात के अहमदाबाद जाने के लिए 23 रुपए मात्र लेकर निकला जिससे बस का भाडा भी पुरा नही हुआ था। पर बस वाले की दरीयादिली थी कि उसने मुझे तीन रुपए वापस लौटा दिये। 250, किलो मीटर का सफर तय करके मे राजस्थान से गुजरात के अहमदाबाद सिटी के कालुपुर रात के लगभग 1:30 बजे मे पहुँचा। ना मेरे पास किसी का पता था ना मेरे पास किसी का काँटेक्ट् था। ऑटो रिक्शा वाले से वाडीला...